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बात तो सही है!

चाय पर काल्पनिक चर्चा - Two indian corporate employees discussing politics at a tea stall. बात तो सही है! hindi satire by Gaurav Sinha
चाय पर काल्पनिक चर्चा – Image Generated by AI (GROK)

अरनब: अरे सुना तुमने पड़ोस में क्या किया जेन ज़ी ने?

सुधीर: क्या हुआ अब?

अरनब: अरे बहुत बुरा हुआ, बाहरी ताक़तों के बहकावे में आकर अपने ही देश को जला डाला। माना सरकार ने ग़लत किया, भ्रष्टाचार कंट्रोल नहीं किया, नेताओं ने अपने बच्चों को सादा जीवन जीना नहीं सिखाया। ये सोशल मीडिया पर सब शो-ऑफ़ करना ज़रूरी थोड़ी था। हाँ, अपने ही नागरिकों पर गोलियाँ चलवाना भी ग़लत था। पर सरकार और नेताओं का तो सबको पता है। नागरिकों को समझना चाहिए, अपना ही देश बर्बाद कर दिया। कितना नुक़सान हुआ।

सुधीर: नेता लोग करोड़ों-अरबों का घोटाला करें तो उनको सूट करता है। जनता हिंसा पर उतर आए, बिलकुल ग़लत है। ऐसे देश तो कितने साल पीछे चला गया। सरकारें चाहें जितनी भी भ्रष्ट हों, देश तो धीरे-धीरे चल ही रहा था। बहुत ग़लत हुआ।

अरनब: ख़ैर शुक्र है, अपने देश में ये सब नहीं होगा। सरकारें भी समझदार और लोग भी।

सुधीर: हाँ भाई, सही बात। हम लोग अपने दुखों के साथ भी खुश हैं। करें भी तो क्या, ये ग़रीब हज़ार-दो हज़ार के लालच में वोट बेच देते हैं। मेरी तो समझ से परे है। लोकतंत्र में नागरिकों को समझदार होना पड़ेगा।

अरनब: अरे बिलकुल, सही पकड़ा तुमने। हर इलेक्शन में नेता कुछ पैसे बाँट देते हैं और लोग कुछ पैसों में बिक जाते हैं। इनको समझ ही नहीं आता रेवड़ी कल्चर। सच में पढ़ाई-लिखाई ज़रूरी है, ये अनपढ़ लोग समझते नहीं कुछ भी। फँसते तो हम मिडिल क्लास वाले ही हैं। टैक्स भी हम भरें और सारी मुसीबतें भी हम झेलें।

सुधीर: वैसे सोशल मीडिया इतना बुरा भी नहीं। वो मेरे भाई का दोस्त है न, इन्फ्लुएंसर। पता है उसको एक-एक रील के लाखों मिल रहे, वो भी सरकारी विभाग से। कहाँ हम मर-मर के जितने महीनों में कमाते हैं, ये लोग एक वीडियो से कमा रहे। और काम भी अच्छा—देश सेवा का, सरकार की नीतियों का प्रचार-प्रसार।

अरनब: अरे तुम उस पेट्रोल में गन्ने का जूस मिलाने वाली बात तो नहीं कर रहे? यार मेरी गाड़ी का तो कबाड़ा हो गया। पर मैंने भी रील्स देखी हैं कुछ, बात तो ठीक ही लग रही। ग़लत होती तो हर कोई थोड़ी वीडियो डालता—वो रेडियो वाला, वो यूट्यूब वाले। सब एक ही बात कर रहे तो कुछ तो सच्चाई होगी। पर सही है, एक रील के लाखों रुपये। मौज है इनकी।

अरे ये बता, तूने मैच देखा या नहीं? क्या बदला लिया अपनी टीम ने। और हाथ भी नहीं मिलाया, गज़ब बेइज्ज़ती हुई उनकी। मज़ा आ गया।

सुधीर: नहीं यार, मैं ऑफिस में था। मतलब अब सब कुछ नॉर्मल? मैच हो रहे तो… मैं उधर के गाने-फ़िल्में देख लूँ तो दिक्कत तो नहीं? यार, कुछ भी कहो, वो आतिफ गाता तो कमाल है। उसका यूट्यूब चैनल शो ही नहीं कर रहा, शायद अब भी ब्लॉक्ड है।

अरनब: ये ग़लत है। अपने आर्टिस्ट्स को सपोर्ट करो, वो क्या कम हैं किसी से। क्रिकेट की बात और है। वहाँ मजबूरी थी, वरना उनको 2 पॉइंट्स फ्री मिल जाते। तू भी न ऑफिस में बिज़ी रहता है, थोड़ा न्यूज़ देखा कर। दुनिया में क्या हो रहा है, पता रहना चाहिए।

सुधीर: हाँ सोच रहा हूँ, जो ट्रैफिक में 2-3 घंटे फँसता हूँ, उसमें न्यूज़ देखना शुरू कर दूँ। वरना तुझसे बात करते हुए लगता है मुझे तो कुछ पता ही नहीं।

अरनब: बढ़िया आइडिया है। बारिश में जाम तो नॉर्मल है ही। तो उसका सही इस्तेमाल करना ज़रूरी है। हमेशा पॉज़िटिव रहना चाहिए। हर आपदा में अवसर खोज लेना चाहिए। तुझे पता लगा, अंग्रेज़ भी प्रोटेस्ट कर रहे कि बाहर के लोग उनकी जॉब्स ले रहे। सब वक़्त-वक़्त की बात है। पहले हम पे राज करते थे, अब हमसे डर रहे।

सुधीर: अब ये क्या है?

अरनब: अरे न्यूज़ न सही, मेरा स्टेटस ही देख लिया कर भाई। वैसे प्रोटेस्ट अपने देश में भी हो रहे, पर वो अपना इंटरनल मैटर है।

सुधीर: हाँ तुम स्मार्ट हो भाई, ये मैच और यूके वाले प्रोटेस्ट्स के स्टेटस लगाने में रिस्क भी नहीं है। वरना प्रोटेस्ट तो अपने देश में भी हर जगह हो रहे, पर वो थोड़ा रिस्की मैटर हो जाता है।

अरनब: अरे ऐसा कुछ नहीं, मैं बस पक्की ख़बर ही शेयर करता हूँ। मैंने तो नहीं देखा कोई प्रोटेस्ट किसी न्यूज़ चैनल पर। अब किसी यूट्यूबर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का क्या भरोसा, कुछ भी लगा देते हैं पैसों के चक्कर में। कुछ लोग फैला रहे कि एक रुपये में साल भर के लिए ज़मीन लीज़ पर मिल रही कारोबारियों को। बताओ, पॉसिबल है ये? फ़ेक न्यूज़ ही होगी। तुम हर किसी पर भरोसा मत किया करो।

सुधीर: हाँ भाई, बात तो सही है।

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