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गोल रोटी ऑन वैलेंटाइन्स डे

एक अच्छे से पकी हुई, अनोखे मानचित्र-सी रोटी और अधपकी या जली हुई गोल रोटी में से कौन-सी बेहतर? Blog Post By Gaurav Sinha - गोल रोटी ऑन वैलेंटाइन्स डे
इमेज AI “एक अच्छे से पकी हुई, अनोखे मानचित्र-सी रोटी और अधपकी या जली हुई गोल रोटी में से कौन-सी बेहतर?

वैलेंटाइन्स डे से एक दिन पहले, गलती से पूछ लिया – “क्या गिफ्ट चाहिए?”
फिर बात संभालने के लिए कहा – “कल मैं अपने हाथों से खाना बनाकर खिलाता हूँ, उससे अच्छा गिफ्ट क्या होगा।”

जोश-जोश में बोल तो दिया था, मगर खाना पकाना कितना आसान है, ये बस वही जानते हैं जिनको खाना बनाना नहीं आता।
खैर, खाना क्या पकाना था, अपनी एक्सपर्टीज़ तो रोटी बनाने या पराठे सेंकने तक ही सीमित है। आटा गूँथा गया, और रोटियाँ बननी शुरू हुईं।

किस्मत देखिए, पहली रोटी बिल्कुल गोल। दूसरी थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी, और ऐसे ही सिलसिला चलता रहा।
रोटी पकाते समय कुछ सवाल दिमाग में भी पकने शुरू हुए। जैसे, रोटी गोल बनेगी ये किस बात पर निर्भर करता है? अच्छे से पकेगी या नहीं, ये किस बात पर? एक अच्छे से पकी हुई, अनोखे मानचित्र-सी रोटी और अधपकी या जली हुई गोल रोटी में से कौन-सी बेहतर?

तो एक-एक कर सवालों को टटोला गया, जैसे रोटियों को तवे पर पलटा जाता है।
रोटी गोल होगी, इस पर निर्भर करता है कि आटा कैसा गूँथा। उसकी लोई या लड्डू बेलने से पहले अच्छे से बने कि नहीं।
मतलब, अगर बेस गड़बड़ है, तो चाहे फिर जो मर्ज़ी तकनीक लगा लो, रोटी गोल तो नहीं बन सकती।

खैर, मान लो अगर एक रोटी गोल तो बनी, पर सेकते वक्त लापरवाही से या तो जल गई, या कच्ची रह गई।
और दूसरी रोटी टेढ़ी-मेढ़ी, एस्थेटिकली देखने में बेकार, मगर अच्छे से पकी, मतलब खाने लायक।
अब इन दोनों में से कौन-सी बेहतर? क्या रोटी का सिर्फ गोल होना काफी है, या खाने लायक होना?

ठीक यही बात हम इंसानों पर भी लागू होती है।
कहाँ जन्म लिया, कैसा बचपन था, और भी सौ बातें जो हमारे हाथ में नहीं, हमारा एस्थेटिक होना या न होना डिसाइड कर देती हैं, हमारे जन्म लेने से पहले।
मतलब, हमारा आज का स्वरूप कैसा है, वो भी बहुत-सी वजहों से हो सकता है, लेकिन आखिरकार मायने यह रखता है कि हम इंसान के तौर पर खुद को कितना प्रभावी बनाते हैं।

सुंदरता और सफलता के सामाजिक मानकों पर फिट बैठना ही सब कुछ नहीं।
हमारा ऊपरी रूप, या हमारा बचपन, परवरिश — ये हमारे हाथ में न सही।
लेकिन इंसान के तौर पर हम कितना निखर सकते हैं, इसका फैसला तो सिर्फ और सिर्फ हम ही कर सकते हैं, हमें ही करना चाहिए।

आपका सफर एक गोल रोटी से जली या अधपकी रोटी तक,
या फिर टेढ़ी-मेढ़ी मानचित्र-सी दिखने वाली रोटी से एक अच्छे से पकी हुई स्वादिष्ट रोटी तक — कुछ भी हो सकता है।
फैसला आपके हाथ में है।

कुछ सवाल फिर से एक बार दोहराते हैं —

• रोटी गोल बनेगी, ये किस बात पर निर्भर करता है?
• एक टेढ़ी-मेढ़ी मगर पकी हुई रोटी और गोल मगर जली हुई रोटी में से कौन-सी बेहतर है?
• रोटी का गोल होना ज़रूरी है या खाने लायक होना?

इसी के साथ रोटी बनाने की ये कुकिंग क्लास खत्म होती है।
रेसिपी में नुक़्स निकालना हो, तारीफ करनी हो, कोई नई डिश जोडनी हो या तड़का लगाना हो —
इन सबके लिए कमेंट बॉक्स या स्टोरी ऑप्शन का उपयोग करें।

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