
एक छोटा बच्चा गुस्से में अपने दादा के पास गया और बोला —
“दादा जी, ये पापा को समझाओ, कल से बोल रहा हूँ, स्कूल की फीस दे दो। सुन ही नहीं रहे। मुझे स्कूल से निकाल देंगे, तो कैसे पढ़ूँगा मैं। बोल रहे हैं स्कूल कोई पढ़ने की जगह है, जाओ गली में लड़ाई-झगड़ा करो। मुझे तो लगता है पापा का दिमाग खराब हो गया है।”
“अरे मेरे प्यारे बच्चे, पापा सही तो कह रहे। जाओ, लड़ना-झगड़ा सीखो… स्कूल में क्या करोगे? तुम्हारे पापा ने पढ़-लिख कर क्या उखाड़ लिया, बस टॉप का डॉक्टर ही तो बन पाया।”
दादा का यह डायलॉग सुनकर बच्चे का दिमाग सुन्न हो गया। वह भागता-भागता मम्मी के पास गया —
“मम्मी, मम्मी, मुझे तो लगता है पापा और दादा जी दोनों पागल हो गए हैं। कहते हैं स्कूल जाना बंद करो, गली में लड़ाई-झगड़ा करो।”
मम्मी टीवी से नज़र हटाए बिना बोली —
“अरे बहुत गलत बात है, उनको बोलो कद्दू की सब्ज़ी खानी पड़ेगी ब्रेकफ़ास्ट में। तुम जाओ छत पर एंटेना हिला कर आओ, टीवी साफ़ नहीं आ रहा।”
एंटेना? छत पर? हमारे अपार्टमेंट में तो 20 फ्लोर हैं और हम दसवें फ्लोर पर। 2025 में स्मार्ट टीवी तो नेट से चलता है—डिश तो पिछले साल ही बाल्कनी से हटा दी थी। हमारी सोसाइटी में कौन सी गली है जाकर वहां लड़ाई-झगड़ा करूँ? किससे करूँ? ये सब मिलकर अप्रैल फूल बना रहे हैं क्या—नवंबर में?
सर खुजलाता हुआ बच्चा फिर दादा के पास गया और बोला —
“दादा जी, मम्मी कह रही कद्दू की सब्ज़ी खानी पड़ेगी आपको ब्रेकफ़ास्ट में। पर अभी तो ईवनिंग स्नैक्स का टाइम है।”
“हाहाहा, मेरा प्यारा बच्चा, इसलिए तो कहते हैं ज़्यादा पढ़ना-लिखना नहीं चाहिए। तेरे पापा का भी बुरा हाल हो गया था, वो तो अच्छा है कि अब थोड़ी समझ आई है। चल आ मेरे पास बैठ, न्यूज़ देख, लाइफ में ऐसे भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। देखो, सुप्रीम कोर्ट कितनी इंपोर्टेंट बात कह रहा। मल्टीप्लेक्स में समोसे और पॉपकॉर्न हजार रुपये के—बहुत चिंता का विषय है, और सड़क पर अब कुत्ते भी हटाए जा रहे। इसका क्या मतलब हुआ, बताओ?”
“समझ गया, दादा जी। अब मैं रोज़ गली में जाकर लड़ाई-झगड़ा कर सकता हूँ; कुत्ते नहीं होंगे तो डर भी नहीं लगेगा, और स्कूल जाने का झंझट भी ख़त्म।”
दादा जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने ज़ोर से बच्चे को गले लगा लिया और उनकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।
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completely nonsensical alternate universe. Hahahahaha… Ek minute chahiye to let this sink in . But I guess is generation ke narangi santre jab dadaji banenge to aisei banenge !
Jo haal is saal hua hai Dilli aur Desh ka, santro kya alloo, baingan aur karele sab samjhenge jald hi, thank you for the sensible comment and feedback 🙂